kajligarh fort
Monday, 25 May 2015
kajligarh fort
kajligarh fort
kajligarh
जब फूल कोई मुस्काता है
प्रीतम की सुगंध आ जाती है ,
नस नस में भंवर -सा चलता है मधुमास जलन तड़पाती है
_____ यादों की नदी की घिर आती है , हर मौज़ में हम तो बहते है
दिल पंछी बन उड़ जाता है , हम खोये-खोये रहते है _____
kajligarh
kajligarh
कजलीगढ़ किला इंदौर
रुत है मिलन की
साथी मेरे आ रे ...... मोहे कही ले चल ,बाहों के सहारे
बागों में ,खेतों में कजलीगढ़ के मुहाने
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